Qateel Shifai Shayari - Page 4

Apne Hothon Par Sajana Chahta Hu

अपने होठों पर सजाना चाहता हूँ,
आ तुझे मैं गुनगुनाना चाहता हूँ।

कोई आंसू तेरे दामन पर गिराकर,
बूँद को मोती बनाना चाहता हूँ।

थक गया में करते-करते याद तुझको,
अब तुझे मैं याद आना चाहता हूँ।

छा रहा है सारी बस्ती में अँधेरा,
रौशनी दो घर जलाना चाहता हूँ।

आखिरी हिचकी तेरे जानों पा आये,
मौत भी में शायराना चाहता हूँ।

Mujhse Tu Poochhane Aaya Hai

Mujh se tu poochhane aayaa hai wafa ke maani,
Ye tiri saada-dili maar na daale mujh ko.

Angdai Par Angdai Leti Hai

अंगड़ाई पर अंगड़ाई लेती है रात जुदाई की
तुम क्या समझो, तुम क्या जानो बात मेरी तनहाई की

कौन सियाही घोल रहा था वक़्त के बहते दरिया में
मैंने आँख झुकी देखी है आज किसी हरजाई की

वस्ल की रात न जाने क्यूँ इसरार था उनको जाने पर
वक़्त से पहले डूब गए तारों ने बड़ी दानाई की

उड़ते उड़ते आस का पंछी दूर उफक में डूब गया
रोते रोते बैठ गई आवाज़ किसी सौदाई की

Garmi-E-Hasrat-E-Naakaam Se

Garmi-e-hasrat-e-naakaam se jal jaate hain,
Ham charaagon ki tarah shaam se jal jaate hain.

Pyas Wo Dil Ki Bujhane Kabhi Aaya Bhi Nahi

प्यास वो दिल की बुझाने कभी आया भी नहीं
कैसा बादल है जिसका कोई साया भी नहीं

बेस्र्ख़ी इस से बड़ी और भला क्या होगी
एक मु त से हमें उस ने सताया भी नहीं

रोज़ आता है दर-ए-दिल पे वो दस्तक देने
आज तक हमने जिसे पास बुलाया भी नहीं

सुन लिया कैसे ख़ुदा जाने ज़माने भर ने
वो फ़साना जो कभी हमने सुनाया भी नहीं

तुम तो शायर हो ‘क़तील’ और वो इक आम सा शख्स़
उस ने चाहा भी तुझे और जताया भी नहीं

Ab Jis Ke Jee Mein Aaye

Ab jis ke jee mein aaye wahi paaye raushani,
Ham ne to dil jala ke sar-e-aam rakh diya.

Jab Bhi Chahe Ek Nayi Surat

जब भी चाहें एक नई सूरत बना लेते हैं लोग
एक चेहरे पर कई चेहरे सजा लेते हैं लोग

मिल भी लेते हैं गले से अपने मतलब के लिए
आ पड़े मुश्किल तो नज़रें भी चुरा लेते हैं लोग

है बजा उनकी शिकायत लेकिन इसका क्या इलाज
बिजलियाँ खुद अपने गुलशन पर गिरा लेते हैं लोग

हो खुशी भी उनको हासिल ये ज़रूरी तो नहीं
गम छुपाने के लिए भी मुस्कुरा लेते हैं लोग

ये भी देखा है कि जब आ जाये गैरत का मुकाम
अपनी सूली अपने काँधे पर उठा लेते हैं लोग

Gar De Gaya Hamein Toofan Bhi Qateel

Gar de gaya hamein toofan bhi “Qateel”
Saahil pe kashtiyon ko dooboya karenge ham.