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Sushil Kumar Verma

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  • Sushil Kumar Verma

    शंख बजे ज्यों ही ठण्डी के,
    मौसम ने यूं पलट खाया,
    शीतल हो उठा कण-कण धरती का,
    कोहरे ने बिगुल बजाया!!


    हीटर बने हैं भाग्य विधाता,
    चाय और कॉफी की चुस्की बना जीवनदाता,
    सुबह उठ के नहाने वक्त,
    बेचैनी से जी घबराता!!


    घर से बाहर निकलते ही,
    शरीर थरथराने लगता,
    लगता सूरज अासमां में आज,
    नहीं निकलने का वजह ढूढ़ता!!


    कोहरे के दस्तक के आतंक ने,
    सुबह होते ही हड़कंप मचाया,
    शंख बजे ज्यों ही ठण्डी के
    मौसम ने यूं पलटा खाया!!


    दुबक पड़े इंसान रजाईयों में,
    ठण्ड की मार से,
    कांप उठा कण-कण धरती का
    मौसम की चाल से!!


    बजी नया साल की शहनाईयां,
    और क्रिसमस के इंतज़ार में,
    झूम उठा पूरा धरती,
    अपने-अपने परिवार में!!


    शंख बजे ज्यों ही ठण्डी के,
    मौसम ने यूं ही पलट खाया,
    शीतल हो उठा कण-कण धरती का,
    कोहरे ने बिगुल बजाया!!

    सुशील कुमार वर्मा

  • #2
    nice...
    Mein tainu kise cheej wang rakh k bhul kyn ni janda..
    ਮੈ ਤੈਨੂੰ ਕਿਸੇ ਚੀਜ ਵਾਂਗ ਰੱਖ ਕੇ ਭੁੱਲ ਕਿਓ ਨੀ ਜਾਦਾ...
    sigpic

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