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Munnawar Rana Shayari

Yaad Rakh Hum Bhi Isi Roo-E-Zameen

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Yaad rakh Hum bhi isi Roo-e-zameen par ek din,
Tera ye Zulam kisi ko bhi Na Sehne denge,
Sirf Thodi si Madad Ghaib se mil jaane de,
Hum Tujhe Duniya ke Naqshe pe na rehne denge.

Ek Neewale Ke Liye Maine Jise Maar Diya

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Ek Neewale Ke Liye Maine Jise Maar Diya,
Woh Parinda Bhi Kai Roz Ka Bhukha Nikla.

Ye Jo Kalam Dawat Liye Kandho Pe

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ये जो कलम दवात लिये कंधों पे फिरा करते हैं,
मर भी जाएं तो भी शायर नही होने वाले..

Saare Hawa Mein Ghol Di Hai

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सारे हवा में घोल दी है नफरतें और हवास अहल ए सियासत ने
मगर न जाने क्यों पानी कुँए का आज तक मीठा निकलता है.

Haye Wo Daure Zindagi

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हाय वो दौरे ज़िन्दगी, जिसका लक़ब शबाब था,
कैसी लतीफ़ नींद थी, कैसा हसीं ख़्वाब था…..

Ye Toh Theek Hai Teri Jafa Bhi Hai

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यह तो ठीक है तेरी जफ़ा भी है एक अता मेरे वास्ते,
मेरी दुआओं की कसम तुझे, कभी मुस्कुरा के भी देख ले.

Ek Halat Par Na Rehne Payi

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एक हालत पर न रहने पायी दिल की हसरते,
तुमने जब देखा नए अंदाज से देखा मुझे.

Khud Apne Aapko Shadab Karna Chahta Hai

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ख़ुद अपने आपको शादाब करना चाहता है,
ये कलम का फ़क़ीर आपको आदाब करना चाहता है !

Ghazal Aur Shayari Ki Saltanat

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ग़ज़ल और शायरी की सल्तनत पर आज भी क़ब्ज़ा हमारा है
इसलिए तो हम अपने नाम के आगे अभी राना लगाते हैं.

Meri Neki Ginne Ki Naubat

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मेरी नेकियाँ गिनने की नौबत ही नहीं आएंगी,
मैंने जो माँ पे लिखा है वही काफ़ी होगा…