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वो दर्द इस दर्द ...

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  • वो दर्द इस दर्द ...

    दिल जब जलता है तो धुआँ नहीं होता,
    क्या गुजरती है किसी को गुमा नहीं होता ...

    हर चोट इक नया दर्द दे के जाती है,
    हमारी तन्हाई का कोई साथी नहीं होता ...

    मौत का डर कहाँ अब इस दिल दीवाने को,
    वो दर्द इस दर्द से बड़के तो नहीं होता ...
    तु है रब मेरा, रब जाण्दा ऐ, मैनू काफ़िर कह के न सतया कर,
    मैनू मोड़ दे पावें लखवारी, मेरे इश्क दा मान त रख्या कर
    हुंण और न मेरी तलब कोई , मैं किस दर जा फ़रियाद करां
    दिल ने तुझे हफ़िज मान लया, होना फ़ना रख दर दे सर
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