tinku budhlada
15th December 2009, 09:55 AM
हर ख़ुशी है लोगों के दामन में पर एक हंसी के लिए वक़्त नहीं!!!!!
दिन रात दौड़ती दुनिया में ज़िन्दगी के लिए भी वक़्त नहीं!!!!!
माँ की लोरी का एहसास तो है पर माँ को माँ कहने का वक़्त नहीं!!!!!
सारे रिश्तों को तो हम मार चुके अब उन्हें दफनाने का भी वक़्त नहीं!!!!!
सारे नाम मोबाइल में हैं लेकिन दोस्ती के लिए भी वक़्त नहीं!!!!!
गैरों की क्या बात करें जब अपनों के लिए भी वक़्त नहीं!!!!!
आँखों में है नींद बड़ी पर सोने का भी वक़्त नहीं!!!!!
दिल है गमो से भरा हुआ पर रोने का भी वक़्त नहीं!!!!!!
पराये एहसानों की क्या क़द्र करें जब अपने सपनो के लिए ही वक़्त नहीं!!!!!
तू ही बता ऐ ज़िन्दगी, इस ज़िन्दगी का क्या होगा, की हर पल मरने वालों को जीने का भी वक़्त नहीं....
दिन रात दौड़ती दुनिया में ज़िन्दगी के लिए भी वक़्त नहीं!!!!!
माँ की लोरी का एहसास तो है पर माँ को माँ कहने का वक़्त नहीं!!!!!
सारे रिश्तों को तो हम मार चुके अब उन्हें दफनाने का भी वक़्त नहीं!!!!!
सारे नाम मोबाइल में हैं लेकिन दोस्ती के लिए भी वक़्त नहीं!!!!!
गैरों की क्या बात करें जब अपनों के लिए भी वक़्त नहीं!!!!!
आँखों में है नींद बड़ी पर सोने का भी वक़्त नहीं!!!!!
दिल है गमो से भरा हुआ पर रोने का भी वक़्त नहीं!!!!!!
पराये एहसानों की क्या क़द्र करें जब अपने सपनो के लिए ही वक़्त नहीं!!!!!
तू ही बता ऐ ज़िन्दगी, इस ज़िन्दगी का क्या होगा, की हर पल मरने वालों को जीने का भी वक़्त नहीं....